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इरफ़ानियत

  • Writer: Gulzarish
    Gulzarish
  • Jul 7, 2020
  • 1 min read

इरफ़ानियत

जब तू मियाँ की नज़रों से पूरी मैकबेथ कह जाएगा जब तू ठेहरे हुए फ्रेम में पूरी कहानी बतलाएगा जब तू किरदार को एक हाड़ मांस का इंसान बना पाएगा जब तू अपनी आखों से ही अपने नाटक का परचम लहराएगा जब तू मंझे सितारों के बीच में कलाकार की तरह उभर के आएगा जब तू शोरगुल के बाज़ार में अपनी खामोशी का लोहा मनवाएगा जब तू अपनी सादी आखों से लोगों की आखें नम कर जाएगा जब तू हर किरदार में उतरकर उसकी रूह बन जाएगा जब तू कलाकार नहीं कला का अलंकार कहलाएगा जब तू शुन्य के चेतन पटल पे अकेले तारे की तरह चमक पाएगा जब तू सिनेमा का असली पूरक बनके उभर आएगा फिर फिर तू इरफ़ान कहलाएगा और जब जब तू इरफ़ान कहलाएगा तब तब तू अपनी 'इरफ़ानियत' से मिल पाएगा क्यों की इरफ़ान नाम नही विशेषण है और ‘इरफ़ान’ होते नही, सिर्फ़ एक है

आयुश सिंह पालीवाल

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Life is a journey between experiences and expressions.

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