पाताल लोक - लोक कथाएं
- Gulzarish

- Jul 2, 2020
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पाताल लोक - लोक कथाएं
जब जब लोक कथाओ की बात आएगी
तब तब पाताल लोक की कहानी सुनाई जाएगी
लोक कथाएं होती है वो कहानिया
जो दिखाती है समाज के नैतिक मूल्य
और सभ्यताओं का असली आईना
वो होती है जमीन से जुड़ी
कथावाचक सुनाते है इसे पीढ़ी दर पीढ़ी
और बताते है आपकी संस्कृति और परिवेश
का असली माईना
आपने सुनी होगी अखबर बीरबल और पंचतंत्र की कथाएं
ठीक वैसे ही सुनाई जाएगी हाथीराम और हथोड़ा त्यागी की व्यथाएं
अब जब जब बात उठेगी हिरणकश्यप के ब्रह्म वरदान की
तब तब कहानी सुनायी जाएगी हथोड़ा त्यागी के आक्रोश और अभिमान की
वो फंसा हुआ था समय के काल में
बुना गया था एक अनचाहे जाल में
धर्म से था उसका भी नाता
एकलव्य की तरह था उसने अपना अंगूठा काटा
मान दो नल्ली को अपना द्रोणाचार्य
वो अंत तक मास्टर जी मास्टर जी जपता जाता
एक कुत्ते से सीखा था उसने युदिष्ठिर वाला धर्म ज्ञान
अंत तक अडिग और अटल रहा उसका ईमान
नहीं जाना था उसे स्वर्ग द्वार
आखिर उसके अंदर का धर्म अंश ही बना उसकी मौत का हथियार
हाथीराम था शायद विष्णु का अवतार,
पाताल लोक का होके भी
उसके अंदर था धर्म विचार
जब हिरणकश्यप रुपी राक्षस से लड़ने की बात आयी
तब उसने नरसिम्हा जैसा रूप लेके धर्म युद्ध करने की योजना बनायीं
हो सकता है हो वो हनुमान का अवतार
जिसने अपने वर्दी पे लगी आग से
वाजपेयी और भगत की लंका जलाई
या फिर वो हो सकता है कोई और
जो भी हो बना लो और खुद की एक लोक कथा कह डालो
जैसे लगता है मुझे संजीव मेहरा और डॉली की कहानी में है
सावित्री और सत्यवान का सच
जिस तरह सावित्री ने यम से छिन लाया था सत्यवान का जीवन
उसी तरह डॉली ने अनजाने में अपने पती की जान बचाई
जैसे दशरथ के चारो पुत्रों के मिलन का साक्षी बना था चित्रकूट
उसी तरह इस जगह ने ग्वाला गुज्जर और दो नल्ली की पटकथा सुनाई
पर एक बात जो सबसे ज़्यादा समझ में आयी
वो थी आखिर में कबीर के दोहे की सच्चाई
प्रेम प्रेम सब कोई कहे
प्रेम न चिन्हे कोई
अघट प्रेम पिंजर बसे
प्रेम कहावे सोय
सुप्रसिद्ध कवी नाटककार उपन्यासकार या हो कोई लोक गीतकार
सब इस पाताल लोक में से कुछ न कुछ सीख के जाएंगे
और आने वाले कल में अपनी अपनी लोक कथाएं सुनाएंगे
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